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आरती श्रीकृष्ण महाराज

आरती · आरती कुंजबिहारीकी

आरती कुंजबिहारीकी । जय बोलो कृष्ण मुरारी की ॥धृ॥

 

गले में बैजयंती माला, बजावे मुरली मधुर बाला। कानो में कुंडल,

झलकती मंडल, नंद के नंद बिहारीकी। जय बोलो कृष्ण मुरारी की ॥१॥

 

कनकमय मोरमुकुट विलसे । देवता दर्शन को तरसे, बजावे चंग, और मुदंग,

ग्वालीनी संग । लाज रखो गोप कुमारी की । जय बोलो कृष्ण मुरारी की ॥२॥

 

गगनसम कांती झलक काली । की मूर्ति चमक रही बिजली भवरसम अलक,

कस्तुरी तिलक, छवि लके ओ बनवारी की । जय बोलो कृष्ण मुरारी की ॥३॥

 

जहांसे प्रगट हुई गीता । की अर्जुन वीर हुआ श्रोता । दिखाया विश्वरूप,

हुआ दिलखूष मिटाई सब भ्रांती उनकी । जय बोलो कृष्ण मुरारी की ॥४॥