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आरती श्रीचक्रपाणी प्रभूची

आरती · आरती प्रभु मेरे तन-मन-धन की

आरती प्रभु मेरे तन-मन-धन की 

दीजो प्राप्ति मुझे अपन चरण की ।।धु।। 

और तेरे से कुछ नहीं मंगना में बन्दे का सवाल इतना ।।१।। 

गुनाहागार में तेरे चरण का तेरे बिना मुझे दर नहीं किसी का ।।२।। 

हाथ जोड कहे आबाकुमर जी गुनाह माफ कर दो मेरी अरजी ।।३।।